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मंगलवार की शुरुआत में बाज़ार का रुख अनिश्चित बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ़ घोषणाओं को लेकर शुरुआती चिंताएं तब कम हुईं, जब उन्होंने टैरिफ़ की समय-सीमा पहले की 9 जुलाई और 9 अप्रैल की तारीखों से बढ़ाकर 1 अगस्त कर दी। खबरों के मुताबिक, EU को एक व्यापार समझौते की पेशकश भी की गई, जिसे 10% के मूल टैरिफ़ के बावजूद स्वीकार किया जा सकता है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता भी आगे बढ़ रही है। हालांकि, मध्य पूर्व में तनाव और यूक्रेन को आत्मरक्षा के लिए हथियार देने की ट्रंप की घोषणा से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती रही।
जापान पर अधिक टैरिफ़ समेत ट्रंप की टैरिफ़ घोषणाओं से शुरुआत में बाज़ार का रुझान बिगड़ा। लेकिन जून के सकारात्मक US Employment Trends आंकड़ों से US Dollar Index (DXY) में तेज़ बढ़त आई। इसके बाद, ट्रेडर्स ने व्यापार युद्ध की चिंताओं का फिर से आकलन किया, जिससे इंडेक्स की बढ़त कुछ कम हुई। कुछ देशों के लिए टैरिफ़ की समय-सीमा बढ़ाने की ट्रंप की इच्छा ने भी इसमें भूमिका निभाई।
इस बीच, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) ने दरों को स्थिर रखकर बाज़ारों को चौंका दिया, जिससे AUDUSD को बढ़ावा मिला। NZDUSD में भी इसी तरह की चाल रही, जबकि दो दिनों की बढ़त के बाद USDCAD में गिरावट आई, भले ही क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। सोने में नरमी आई, क्रिप्टोकरेंसी पर दबाव रहा और वॉल स्ट्रीट में कमजोर क्लोज़िंग के बाद वैश्विक शेयर बाज़ारों में गिरावट का रुझान रहा। अमेरिका और जापान की बॉन्ड यील्ड में तेजी आई, लेकिन मिले-जुले बाज़ार माहौल में प्रमुख करेंसीज़ अमेरिकी डॉलर की गिरावट से फायदा उठाने में संघर्ष करती रहीं।
अमेरिकी डॉलर में गिरावट से EURUSD और GBPUSD को पहले हुए नुकसान से उबरने में मदद मिली। ऐसा यूरोज़ोन के मिले-जुले आँकड़ों, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड वॉर की आशंकाओं और ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति को लेकर अनिश्चितता के बावजूद हुआ। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने यूरोपीय संघ को एक ट्रेड डील की पेशकश की है, जिसमें यूरोपीय संघ के सामान पर 10% का बेसलाइन टैरिफ होगा, लेकिन विमान और स्पिरिट्स जैसे सेक्टरों को इससे छूट मिलेगी। इससे यह चिंता बढ़ी कि बड़े व्यापारिक मतभेदों के बावजूद अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड वॉर टल सकता है।
यूके में राजकोषीय स्थिति और चांसलर रेचल रीव्स को लेकर हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने फिर से ध्यान खींचा। इससे GBPUSD को उबरने में मदद मिली, खासकर USD में आई कमजोरी के बीच।
इस बीच, जापान पर ट्रंप द्वारा 25% टैरिफ़ लगाए जाने के बाद USDJPY दो हफ्तों के उच्च स्तर के करीब उतार-चढ़ाव करता रहा। धीमी पड़ती वास्तविक मज़दूरी, व्यापार और चालू खाते के मिले-जुले आंकड़ों तथा इको वॉचर्स सर्वे की चिंताओं से भी येन पर दबाव पड़ा।
अमेरिकी डॉलर में गिरावट के बीच AUDUSD करीब 0.80% उछला और G10 करेंसीज़ में सबसे आगे रहा। इस तेजी की वजह रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) का ब्याज दरों को स्थिर रखना था, जबकि बाज़ार में 0.25% कटौती की उम्मीद थी। टैरिफ से जुड़ी कोई नई खबर न आने, जून के मजबूत बिज़नेस कॉन्फिडेंस और बिज़नेस कंडीशंस के आंकड़ों तथा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के जोखिम संकेतक होने से भी उसे सपोर्ट मिला। चीन के नए प्रोत्साहन उपायों, अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में प्रगति और विदेशी बाज़ारों में बॉन्ड खरीदने की योजनाओं ने RBA गवर्नर मिशेल बुलॉक की प्रेस कॉन्फ़्रेंस से पहले इस करेंसी पेयर को और बढ़ावा दिया।
NZDUSD ने अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष की चाल का अनुसरण किया। चीन को लेकर आशावाद और अमेरिका से न्यूज़ीलैंड के लिए व्यापार पर नकारात्मक खबरों की कमी से इसे समर्थन मिला। इस जोड़ी ने चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए दो हफ़्तों के निचले स्तर से वापसी की।
इस बीच, USD में गिरावट से USDCAD को बढ़त मिली, लेकिन कनाडा के प्रमुख निर्यात कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को यह पूरी तरह से झेल नहीं पाया। तीन दिनों में पहली बार इस करेंसी पेयर में गिरावट आई। इसकी गिरावट को कनाडा के मज़बूत रोज़गार आँकड़ों की उम्मीदों से सहारा मिला, जो बैंक ऑफ़ कनाडा की ब्याज दर कटौती की राह में चुनौती बनती हैं और अमेरिका-कनाडा व्यापार संबंधों को लेकर आशावाद बढ़ाती हैं।



अमेरिकी डॉलर में गिरावट के बावजूद, मिले-जुले बाज़ार रुझान के बीच कच्चे तेल और सोने की कीमतें मज़बूती बनाए रखने में संघर्ष करती रहीं। OPEC+ द्वारा आपूर्ति बढ़ाए जाने के कारण कच्चे तेल की कीमतें सप्ताह की शुरुआत में गिरावट के साथ खुलीं। हालांकि, बाज़ार में चर्चा थी कि उत्पादन में वास्तविक बढ़ोतरी इससे कम होगी। भंडार में लगातार कमी से भी तेल की कीमतों को शुरुआती नुकसान की भरपाई करने और दिन का अंत बढ़त के साथ करने में मदद मिली। इसके बाद आज कीमतों में फिर गिरावट आई।
इस बीच, अमेरिका-चीन ट्रेड वार्ता में प्रगति की खबरों और अमेरिका के मज़बूत रोज़गार आंकड़ों से सोने पर दबाव पड़ा, खासकर तब जब यह अहम ट्रेंडलाइन रेज़िस्टेंस को तोड़ने में संघर्ष कर रहा था।
Bitcoin (BTCUSD) और Ethereum (ETHUSD) ने सप्ताह की शुरुआत कमज़ोरी के साथ की, लेकिन मंगलवार की शुरुआत में उनकी दिशा स्पष्ट नहीं थी। क्रिप्टो ट्रेडर्स अगले सप्ताह की तैयारी कर रहे हैं, जिसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने उद्योग के लिए तीन अहम कानून पारित कराने की कोशिश के तहत “क्रिप्टो वीक” नाम दिया है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि मौसमी पूंजी प्रवाह और संस्थागत ट्रेडर्स की चिंता क्रिप्टोकरेंसी पर दबाव डाल रही है।
जापान के शुरुआती आर्थिक डेटा और RBA के कदमों के बाद, मंगलवार का आर्थिक कैलेंडर हल्का है। इसमें केवल जून का कनाडाई Ivey PMI शामिल है। इससे ट्रेडर्स जोखिम से जुड़ी खबरों पर ध्यान दे सकते हैं। अगर ट्रंप व्यापार तनाव बढ़ाते हैं, तो इससे अमेरिकी डॉलर की नई खरीदारी हो सकती है। हालांकि, बुधवार को FOMC मिनट्स जारी होने से पहले की सतर्कता और ट्रंप के टैरिफ पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं कुछ अनिश्चितता बढ़ा सकती हैं।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!