
दिसंबर के उत्साहजनक अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आँकड़ों के बावजूद अमेरिकी डॉलर में तेज़ी नहीं आई। इसकी मुख्य वजह फ़ेडरल रिज़र्व के मिले-जुले बयान थे। शुक्रवार को भू-राजनीतिक तनावों के साथ मिलकर इन कारकों ने बाज़ार की जोखिम लेने की प्रवृत्ति को परखा।
इसके चलते, डॉलर में दैनिक और साप्ताहिक आधार पर अनिश्चितता बनी हुई है, जबकि कमोडिटीज़ ने साप्ताहिक नुकसान की भरपाई की है। वहीं, इन्वेंटरी की स्थिति, चीन की मांग और सप्लाई में कमी की आशंकाओं से क्रूड ऑयल को समर्थन मिला है। हाल के दिनों में ऊपर की ओर गति कमजोर रहने के बावजूद, गोल्ड की कीमत शॉर्ट-टर्म के अहम सपोर्ट स्तर से उबरी है।
हालांकि, अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड यील्ड कई महीनों के निचले स्तरों पर दबाव में बनी हुई है, जिससे इक्विटी और ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड की करेंसी में थोड़ी बढ़त आई है। लेकिन ताइवान में होने वाले चुनाव और अमेरिका-चीन तनाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एशिया-प्रशांत के शेयरों में यह तेजी नहीं दिखी।
EURUSD साप्ताहिक बढ़त को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि GBPUSD में हल्की बढ़त है। इसके अलावा, कमजोर यील्ड के रुझान के साथ USDJPY में गिरावट आई है और बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) की बेहद आसान नीतियों को लेकर बाज़ार की बेचैनी के बीच इसने विक्रेताओं को आकर्षित किया है।
दूसरी ओर, BTCUSD और ETHUSD साल के उच्चतम स्तर से पिछले दिन शुरू हुई गिरावट को आगे बढ़ाने के लिए और संकेत तलाश रहे हैं।
बाज़ार का असमंजस दूर करने के लिए शुक्रवार को अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) और कई केंद्रीय बैंकरों के बयानों पर नज़र रखना अहम होगा।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



दिसंबर में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे और पिछले आंकड़ों से भी मजबूत थे। इससे अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (Fed) की ओर से जल्द ब्याज दरों में कटौती की चिंताएं पीछे चली गईं। हालांकि, अधिकारियों की टिप्पणियों और CPI आंकड़ों के विवरण से आक्रामक रुख को समर्थन नहीं मिला। इनसे इस आशंका के संकेत मिले कि सख्त मौद्रिक नीति का दौर खत्म हो सकता है। इसके चलते महंगाई के आंकड़ों से मिले अमेरिकी डॉलर के लाभ पलट गए और सोने की कीमत को अल्पकालिक अहम सपोर्ट लाइन से उबरने का मौका मिला। इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में नरमी और चीन के महंगाई संकेतों तथा व्यापार आंकड़ों में सुधार ने भी XAUUSD को हालिया नुकसान की कुछ भरपाई करने में मदद की।
अमेरिका का प्रमुख महंगाई सूचक, यानी कंज़्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI), बाज़ार के अनुमान और पिछले आंकड़ों से बढ़कर महीने-दर-महीने 0.3% और साल-दर-साल 3.4% पर पहुंच गया। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि खाद्य और ऊर्जा को छोड़कर CPI, जिसे कोर CPI भी कहते हैं, महीने-दर-महीने 0.3% पर अपरिवर्तित रहा। वहीं, साल-दर-साल यह पिछले 4.0% से घटकर 3.9% पर आ गया, जबकि इसके 3.8% रहने की उम्मीद थी।
फ़ेड की टिप्पणियों की बात करें, तो क्लीवलैंड फ़ेड की अध्यक्ष Loretta Mester ने कहा, “अभी ब्याज दरें घटाने का समय नहीं आया है। हम यह जानने के लिए और सबूत चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ रही है।” हालांकि, रिचमंड फ़ेड के अध्यक्ष Thomas Barkin ने कहा कि महंगाई के 2% के लक्ष्य की ओर बढ़ने पर वे ब्याज दरें घटाने के लिए तैयार हैं। इसी तरह, शिकागो फ़ेडरल रिज़र्व बैंक के अध्यक्ष Austan Goolsbee ने कहा कि आंकड़ों के बिना यह जवाब देना संभव नहीं है कि मार्च की बैठक में हम क्या करेंगे।
दिन की शुरुआत में, चीन का CPI नवंबर के मुकाबले सुधरकर महीने-दर-महीने 0.1% और साल-दर-साल -0.3% रहा। वहीं, Producer Price Index (PPI) भी पहले के -3.0% और बाजार के -2.6% अनुमान से बढ़कर -2.7% पर पहुंच गया। इसके अलावा, चीन का ट्रेड बैलेंस भी बढ़कर $75.34 बिलियन हो गया, जबकि पिछली रीडिंग $68.39 बिलियन थी और बाजार का अनुमान $74.75 बिलियन था।
इसके अलावा, अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड यील्ड में सुस्ती और शेयर बाज़ार में तेजी के साथ-साथ लाल सागर में भू-राजनीतिक तनाव ने भी XAUUSD को रिकवरी की चाल बनाए रखने में मदद की।
अमेरिका और यूके के हूतियों पर संयुक्त हमले की खबरों और इराक में अमेरिकी दूतावास पर हमले की खबरों के साथ-साथ लाल सागर की रक्षा के लिए पश्चिमी देशों की कार्रवाई को दुनिया भर से मिले समर्थन ने बाजार के प्रतिभागियों को भू-राजनीतिक तनाव जल्द खत्म होने की उम्मीद बनाए रखने और सोने की मांग को समर्थन देने में मदद की। ध्यान देने वाली बात है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि यमन में हूतियों के ठिकानों पर आगे और कार्रवाई करने से वह हिचकिचाएंगे नहीं।
बाज़ार के रुख पर दबाव डालने और XAUUSD की मांग बढ़ाने वाला एक और कारक इस सप्ताह होने वाले ताइवान के आम चुनावों से पहले का सतर्कता भरा माहौल है। चीन और अमेरिका के बीच तनाव के बीच, अमेरिका समर्थक सरकार की जीत—जिसकी संभावना कम मानी जा रही है—जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ा सकती है और अमेरिकी डॉलर को समर्थन दे सकती है।
ध्यान देने वाली बात है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की अध्यक्ष Christine Lagarde और नीति-निर्माता Francois Villeroy de Galhau की सख्त मौद्रिक नीति के पक्ष में टिप्पणियों ने यूरो (EUR) को सहारा दिया और अमेरिकी डॉलर की रिकवरी को भी चुनौती दी। इसके अलावा, बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) के अधिकारियों ने वेतन और महंगाई को लेकर मिली-जुली चिंताएँ जताईं और आसान मौद्रिक नीति बनाए रखने के व्यापक दृष्टिकोण को चुनौती दी। वहीं, 2023 में चीन का कच्चे तेल का आयात अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचने की खबर ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव के साथ मिलकर कच्चे तेल की कीमत में रिकवरी को सहारा दिया।
हालाँकि अमेरिका के रोज़गार के आँकड़े और CPI, Fed की ब्याज दरों में कटौती टालने की बात का समर्थन करते हैं, लेकिन हॉकिश रुख की पुष्टि के लिए आज का PPI अहम होगा। अगर इसके साथ उत्साहजनक पूर्वानुमान भी आते हैं, तो इससे अमेरिकी डॉलर की रिकवरी को सहारा मिल सकता है और कमोडिटीज़ के साथ-साथ ऑस्ट्रेलियाई और न्यूज़ीलैंड डॉलर पर दबाव पड़ सकता है।
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