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फ़रवरी में सोने की कीमतों में 6% की गिरावट आई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊँची दरों में और लंबे समय तक बढ़ोतरी की संभावना से बने गिरावट के दबाव को देखते हुए, सोने की कीमत अपने सपोर्ट स्तर को परख सकती है। इससे महँगाई लंबे समय तक ऊँची बने रहने की आशंका को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
सोने की कीमत फिलहाल ओवरसोल्ड ज़ोन में है। इतना ही नहीं, इसमें गिरावट का रुझान बना हुआ है। साल की शुरुआत में एसेट की कीमतों में आई तेज़ी को बढ़ावा देने वाले कुछ कारक कमज़ोर पड़ रहे हैं। साथ ही, व्यापक आर्थिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
एक ओर, USD की कमजोरी और रणनीतिक ब्याज दरों में बदलाव से गोल्ड को समर्थन मिला है। दूसरी ओर, दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ने के बावजूद, US Dollar की कमजोरी समय से पहले दिखी। इन कारकों के चलते गोल्ड की कीमत में गिरावट आई।



इस एसेट की बिकवाली को रोकने में मदद करने वाले दो मुख्य कारक हैं—निरंतर दिलचस्पी और सोने की मज़बूत भौतिक मांग। विशेषज्ञों को भरोसा है कि दो अन्य अहम आधारों को देखते हुए यह इंस्ट्रूमेंट जल्द ही सपोर्ट स्तर को परखेगा। पहला आधार चीन और आधिकारिक क्षेत्र से आने वाली मांग है।
सोना पहले $1,940 प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रहा था और इसके $2,000 से ऊपर जाने का अनुमान था, लेकिन पिछले दिन अप्रैल के वायदा भाव $1,825 प्रति औंस के अधिक यथार्थ स्तर पर देखे गए।
हालांकि केंद्रीय बैंक सोना खरीदना जारी रखे हुए हैं, चीन के आधिकारिक क्षेत्र की मांग धीमी पड़ सकती है, जिससे इसका असर आगे भी फैल सकता है। इस बीच, सोने की आधिकारिक क्षेत्र की खरीद इस एसेट की कीमत को सहारा देने के लिए अहम रही। भारत में भौतिक सोने की मांग भी कमजोर हो रही है।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!